A) भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियां अब राजनीतिक वफादारी के आधार पर चयनात्मक दिखाई देने लगी हैं।
B) जिन नेताओं को कभी “भ्रष्ट” कहा गया, वे भाजपा में शामिल होते ही राजनीतिक रूप से स्वीकार्य बन जाते हैं।
C) जब दल बदलते ही भ्रष्टाचार के आरोप गायब हो जाते हैं, तो जनता का भरोसा कमजोर होता है।
D) भारतीय राजनीति अब विचारधारा और जवाबदेही से ज्यादा सत्ता, छवि और राजनीतिक सुविधा की लड़ाई बनती जा रही है।