A) ऐसी आत्मविश्वास भरी बातें, जो चुपचाप हुई डिलीवरी को ठीक से दिखा नहीं पाईं।
B) वही पुराने वादे, जहाँ घोषणाएँ चलती रहीं लेकिन नतीजे पीछे रह गए।
C) चुनाव से पहले कठिन सवालों से बचने के लिए कहानी गढ़ने की कोशिश।
D) यह याद दिलाने वाला संकेत कि चार साल बाद भी बिना साफ मापदंड के दावे अधूरे लगते हैं।