बालाकोट से सिंदूर तक, ट्रंप से गले मिलने से लेकर चीन पर चुप्पी तक,
क्या मोदी की ‘विदेश नीति’ अब सिर्फ एक व्यक्ति के PR का मंच बन गई है, जबकि भारत को इसका भुगतान जेट, व्यापार और गरिमा में करना पड़ रहा है?
A) हां — ग्लोबल स्टेज, लोकल नुकसान।
B) नहीं — मुश्किल फैसले, मजबूत नतीजे।
C) नहीं कह सकते — सच्चाई शोर में खो गई है।