अगर आधे कांग्रेसी नेताओं ने दिल्ली में वड़िंग की शिकायतें कीं, तो वो अब तक कुर्सी पर कैसे टिके हैं? बघेल की मीटिंग में चन्नी और आशु जैसे नेताओं ने उनकी लीडरशिप पर सवाल उठाए, फिर भी कोई हलचल नहीं।
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क्या पंजाब कांग्रेस अब ऐसी रणभूमि बन गई है जहाँ चन्नी, खैहरा और राणा गुरजीत में से किसी एक को चुनने से आसान है वड़िंग को बनाए रखना?