नवजोत सिद्धू कहते हैं, "वक्त बताएगा" कि वो राजनीति में लौटेंगे या नहीं लेकिन क्या वक्त पहले ही काफी कुछ नहीं बता चुका? क्या वो कांग्रेस के स्थायी 'वाइल्डकार्ड' बन गए हैं—बोलते बहुत हैं, पर रणनीति में कमजोर?
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अगर वापसी इतनी बार हो रही है, तो असर क्यों नहीं दिखता? क्या पंजाब को वाकई एक और 'सिद्धू सीजन' चाहिए?