रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की डिजिटल न्यूज़ रिपोर्ट 2024 के अनुसार, 71% भारतीय ऑनलाइन माध्यमों को समाचार के लिए प्राथमिकता देते हैं, जिनमें से 49% विशेष रूप से सोशल मीडिया पर निर्भर हैं।
Opinion
क्या यह ध्रुव राठी जैसी अधिक स्वतंत्र और आलोचनात्मक आवाज़ों की ओर जाना बदलाव का संकेत है, जो भाजपा के नियंत्रित कथानक को धूल में मिला देगा?
Forty years ago, the Shiromani Akali Dal split in one of the defining moments of Punjab's political history. The leaders changed, the factions changed, but the struggle between ambition and unity seems to have remained the same. Every split creates winners and losers within a party, but history often shows that the greatest beneficiary is an opponent waiting outside. Has the Akali Dal paid a far greater political price for its internal divisions than it ever gained from them ? And is the biggest lesson of 1986 that no political victory inside a party is worth the long-term cost of weakening the movement itself ?
चालीस वर्ष पहले, 1986 में, शिरोमणि अकाली दल का विभाजन पंजाब की राजनीति के सबसे निर्णायक घटनाक्रमों में से एक था। चेहरे बदले, गुट बदले, लेकिन महत्वाकांक्षा और एकता के बीच का संघर्ष मानो कभी नहीं बदला। हर विभाजन किसी पार्टी के भीतर कुछ विजेता और कुछ पराजित ज़रूर पैदा करता है, लेकिन इतिहास अक्सर बताता है कि उसका सबसे बड़ा लाभ पार्टी का बाहरी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी उठाता है। क्या शिरोमणि अकाली दल ने अपनी आंतरिक टूट से जितना राजनीतिक नुकसान उठाया, उससे कहीं कम लाभ पाया ? और क्या 1986 की सबसे बड़ी सीख यही है कि किसी भी पार्टी के भीतर की जीत, यदि संगठन और आंदोलन को ही कमजोर कर दे, तो वह अंततः हार के बराबर होती है ?