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समस्या क्या है ? कांग्रेस पहले समस्याएँ पैदा करती है, फिर उन्हीं समस्याओं को सुलझाने में जुट जाती है और यह सिलसिला चलता रहता है। ऐसा लगता है कि पार्टी अपने राजनीतिक विरोधियों से लड़ने से ज़्यादा समय अपनी ही अंदरूनी लड़ाइयाँ संभालने में बिताती है। इस पूरी कवायद में सबसे ज़्यादा भ्रम पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में फैलता है, जिन्हें समझ ही नहीं आता कि आखिर किस गुट के साथ खड़े हों। यही असली समस्या है। अब भूपेश बघेल पंजाब पहुँच चुके हैं। लेकिन क्या वे खुद भी इस समस्या का हिस्सा हैं ? अगर पंजाब प्रभारी होने के बावजूद वे यह नहीं समझ पाए कि पंजाब कांग्रेस के भीतर क्या पक रहा था, और उन्हें तब पता चला जब चरणजीत सिंह चन्नी ने खुलकर मोर्चा खोल दिया और उबलते बर्तन का ढक्कन हटा दिया, तो आखिर वे इतने समय तक कर क्या रहे थे ? क्या वे ज़मीनी हकीकत समझ रहे थे, या सिर्फ़ वही रिपोर्ट पढ़ रहे थे जो उन्हें सुनाई जा रही थीं ?

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A) पंजाब प्रभारी के रूप में भूपेश बघेल समय रहते संकट को पहचानने और रोकने में विफल रहे।

B) अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) का शीर्ष नेतृत्व लापरवाह रहा और उसने चेतावनी के संकेतों पर बहुत देर से प्रतिक्रिया दी।

C) पंजाब कांग्रेस के गुटों ने जानबूझकर इस बगावत को हवा दी।

D) कांग्रेस ने अपनी अंदरूनी राजनीति का खुद ही सार्वजनिक तमाशा बना दिया है।

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A 90%
B 5%
C 4%
D 1%
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