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चरंजीत सिंह चन्नी के समर्थन में कई वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और पूर्व मंत्रियों के खुलकर सामने आने तथा कांग्रेस हाईकमान से राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग के बाद, पंजाब कांग्रेस अब केवल नेतृत्व संकट ही नहीं बल्कि स्वीकार्यता के संकट से भी जूझती दिखाई दे रही है। ऐसे में एक असहज सवाल उठता है, जब पार्टी का एक बड़ा वर्ग खुलकर चन्नी के साथ खड़ा है और राजा वड़िंग के नेतृत्व पर सवाल उठा रहा है, तो क्या राजा वड़िंग को पार्टी के व्यापक हित में स्वयं पद छोड़ देना चाहिए ? या फिर हाईकमान एक नेता को बचाने के लिए 2027 चुनाव से पहले पार्टी की एकजुटता को दांव पर लगाने को तैयार है ? क्या कोई नेता तब भी प्रभावी ढंग से नेतृत्व कर सकता है, जब उसकी अपनी ही पार्टी का बड़ा वर्ग उसके पीछे खड़ा न हो ?

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A) यदि राजा वड़िंग को संगठन का व्यापक समर्थन नहीं मिल रहा, तो उन्हें पार्टी हित में स्वयं पद छोड़ देना चाहिए।

B) कांग्रेस हाईकमान को बढ़ती हुई चन्नी की स्वीकार्यता और मांग को सुनना चाहिए, न कि अंदरूनी विभाजन को और बढ़ाना चाहिए।

C) किसी भी नेता की सबसे बड़ी ताकत हाईकमान नहीं, बल्कि संगठन का विश्वास होता है।

D) आज बढ़ते असंतोष को नज़रअंदाज़ करना, कल नेतृत्व बदलने से कहीं अधिक महंगा साबित हो सकता है।

Voting Results

A 90%
B 1%
C 3%
D 6%
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