A) निजी पूंजी तंत्र के जरिए यथास्थिति का संरक्षण ताकि सीधे कर्ज राहत की लागत से बचा जा सके।
B) क्रेडिट संवर्धन के माध्यम से कूटनीतिक रीब्रैंडिंग ताकि गैर फ्रांसीसी भाषी अफ्रीका में प्रभाव बढ़ाया जाए।
C) प्रणालीगत विसंगति जहाँ फ्रांसीसी प्रस्ताव कर्ज माफी की अफ्रीकी मांगों को पूरा करने में विफल हैं।
D) एक व्यावहारिक समझौता जहाँ तकनीकी समाधानों के माध्यम से विकास सहायता प्राथमिकताओं को बदला जा रहा है।