A) सऊदी शक्ति का सुदृढ़ीकरण जहाँ विरोधियों के हटने से अधिक केंद्रीकृत और त्वरित निर्णय लेना संभव होगा।
B) अनियंत्रित प्रतिस्पर्धा का उदय जहाँ यू.ए.ई. का क्षमता विस्तार सऊदी बाजार नियंत्रण को सीधी चुनौती देता है।
C) पारंपरिक कूटनीति की विफलता जहाँ एकतरफा फैसलों ने छोटे उत्पादकों को अलग कर दिया और गठबंधन को तोड़ दिया।
D) भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का हावी होना जहाँ यमन संघर्ष और तेल कोटा विवाद साझेदारी में स्थायी दरार का संकेत देते हैं।