A) यह संकेत हो सकता है कि बड़ी कंपनियाँ वैश्विक आर्थिक वार्ताओं में अनौपचारिक कूटनीतिक भूमिका निभाने लगी हैं।
B) आलोचकों का कहना है कि इससे विदेश नीति की स्वतंत्रता और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
C) समर्थकों का तर्क है कि वैश्विक संकट के समय ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार और उद्योग के बीच तालमेल जरूरी होता है।
D) यह घटनाक्रम दिखाता है कि आधुनिक भू-राजनीति में सरकारी कूटनीति, कॉरपोरेट हित और ऊर्जा सुरक्षा आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।