A) बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चुप्पी भारत की वैश्विक नैतिक
आवाज़ को कमजोर कर सकती है।
B) आलोचकों का मानना है कि प्रधानमंत्री पद को अधिक
स्वतंत्र और स्पष्ट रुख दिखाना चाहिए।
C) समर्थक कह सकते हैं कि कूटनीति में अक्सर सावधानी
और संतुलित प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है।
D) यह बहस वर्तमान नेतृत्व में भारत की वैश्विक भूमिका को
लेकर व्यापक चिंताओं को दर्शाती है।