Manipur Burns, Parliament Snoozes: 23 months of ethnic violence, 200 dead, 70,000 displaced, 6.5 lakh rounds of ammunition looted—yet the government discusses it at 2 AM like a last-minute homework submission.
2024 was the hottest year in 175 years, glacier loss is record-breaking, sea levels are rising, and 1.5°C warming is here. What keeps us from seeing climate change as today’s emergency—not tomorrow’s headline?
2024 बीते 175 सालों में सबसे गर्म साल रहा, ग्लेशियर टूटने के रिकॉर्ड बने, समंदर की सतह तेज़ी से बढ़ रही है और 1.5°C की गर्मी हकीकत बन चुकी है — फिर भी हमें जलवायु संकट आज की आपात स्थिति क्यों नहीं लगती?
मणिपुर जलता रहा, संसद सोती रही: 23 महीने से जातीय हिंसा, 200 मौतें, 70,000 बेघर, 6.5 लाख गोलियां लूटी गईं—फिर भी सरकार ने इसे रात 2 बजे ऐसे निपटाया जैसे आखिरी वक्त का होमवर्क!