If renaming 17 places with Muslim/Mughal names in Uttarakhand is truly about “public sentiment & heritage,” why does this sentiment conveniently peak around elections and festivals—never for better roads, schools, or hospitals?
अगर उत्तराखंड में मुस्लिम/मुगल नामों वाले 17 स्थानों का नाम बदलना वाकई "जनभावना और विरासत" का सम्मान करना है, तो यह भावना चुनावों और त्योहारों के आसपास ही क्यों जागती है—सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों के लिए क्यों नहीं होती?
Rahul Gandhi protested for forests, fought for Adivasis in BJP ruled states, but why is he silent when his own party is destroying 400 acres of greenery in Telangana? Where is his ‘Bharat Jodo’ spirit now?
राहुल गांधी ने जंगलों के लिए प्रदर्शन किया, बीजेपी शासित राज्यों में आदिवासियों के लिए संघर्ष किया, लेकिन जब उनकी अपनी पार्टी तेलंगाना में 400 एकड़ हरियाली नष्ट कर रही है, तब वे चुप क्यों हैं? उनका 'भारत जोड़ो' जज़्बा अब कहाँ है?