रात के बादशाह या लोकतंत्र का तमाशा? वक्फ़ बिल आधी रात के बाद 12 घंटे की बहस के बाद क्यों पास किया गया — ज़रूरी था या जनता से छुपाना था? आपका क्या मानना है?
When the Government fails to curb drugs, they send school kids with banners. Shouldn’t leaders be cracking down on drug lords instead of organizing rallies? Can placards and processions replace strict law enforcement? What’s your take?
जब सरकार नशे पर काबू पाने में नाकाम रहती है, तो स्कूल के बच्चों को बैनर पकड़ाकर भेज देती है। क्या नेताओं को नशे के सौदागरों पर सख्त कार्रवाई नहीं करनी चाहिए बजाय रैलियां निकालने के? क्या पोस्टर और जुलूस सख्त कानून लागू करने की जगह ले सकते हैं? आपकी राय क्या है?