दिवंगत अकाली नेता रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा के बेटे रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा की राजनीतिक जड़ें मजबूत पंथक राजनीति से जुड़ी हैं। शिरोमणि अकाली दल से निष्कासित होने के बाद अब वह आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए हैं। अगर ब्रह्मपुरा की जड़ें पंथक राजनीति से जुड़ी हैं, तो आम आदमी पार्टी में शामिल होना उनकी उस राजनीतिक पहचान से कैसे मेल खाता है, खासकर तब जब भगवंत मान को अकाल तख्त की ओर से कड़ी निंदा का सामना करना पड़ा है ? क्या यह विचारधारा में बदलाव है या सिर्फ राजनीतिक घर बदलना ?
AAP has begun taking its four-year record door to door, while its campaign pamphlets also warn voters about what could happen if opposition parties return to power. But after nearly five years in Government, the sharper question is: Is AAP asking Punjab to vote for its own record or scaring voters with what it says the Opposition might do ? What should AAP change in its 2027 campaign if it really wants Punjab to judge its Government on performance ?
आम आदमी पार्टी घर-घर जाकर अपनी चार साल की उपलब्धियों का रिकॉर्ड पहुंचाना शुरू कर चुकी है, जबकि उसके चुनावी पर्चों में यह भी बताया जा रहा है कि विपक्षी दलों के सत्ता में लौटने पर क्या हो सकता है। लेकिन करीब पांच साल सरकार में रहने के बाद बड़ा सवाल यह है: क्या आम आदमी पार्टी पंजाब से अपने काम के आधार पर वोट मांग रही है या विपक्ष के बारे में आशंकाएं दिखाकर वोट मांग रही है ? अगर आम आदमी पार्टी चाहती है कि 2027 में पंजाब उसकी सरकार को काम के आधार पर परखे, तो उसे अपने चुनावी अभियान में क्या बदलना चाहिए ?