अगर AAP के दावों के मुताबिक दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था वाकई "वर्ल्ड-क्लास" है, तो फिर मनीष सिसोदिया ने अपने बेटे को उच्च शिक्षा के लिए कनाडा क्यों भेजा और बैंक की जगह व्यक्तियों से ₹1.5 करोड़ का क़र्ज़ क्यों लिया?
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क्या यह उन्हीं स्कूलों पर अविश्वास का संकेत है, जिनकी उनकी पार्टी तारीफ़ करती है?